पापा का काम वाली और पड़ोसन के साथ था अफेयर , मम्मी नहीं चाहती थी बच्चो को पता लगे बाप के बारे

  
parul arya life story

कई ऐसी कहानियां सुनने को मिलती है। जिसे सुन काफी हैरानी होती कि कोई पिता भी ऐसा हो सकता है। जिसे सिर्फ अपनी जिंदगी से मतलब होती ना की अपने बच्चो की जिंदगी से ऐसी ही एक कहानी आज हम आपको बताने वाले। जिसे जानने के बाद आपको भी काफी हैरानी होगी। ये कहानी पारुल आर्या की है। जो की पेशे से एक इंग्लिश टीचर है। जिन्होंने अपनी लाइफ में कई ऐसी चीज़ों को देखा है। जिसे उन्होंने खुद एक इंटरव्यू के दौरान साझा किया है। तो आईए जानते है पारुल आर्या की जुबानी। 

पिता का था कामवाली और पड़ोसन के साथ अफेयर

पारुल आर्या नागपुर शहर की रहने वाली है। जो पेशे से एक इंग्लिश टीचर है। जिन्होंने अपने बचपन के किस्से बताए। पारुल आर्या ने बताया कि, मेरे पिता के कई एक्सटर्नल मैरिटल अफेयर थे। जिस कारण हमारे माता - पिता के बीच आए दिन लड़ाई और झगड़े होते रहते है। उस दौरान मां रेलवे में कार्यरत थी और मेरे पिता एक ऑटो ड्राइवर थे। जिनका कई लोगो के साथ अफेयर था। जिस कारण घर का माहौल भी काफी खराब रहता था। और मेरी मां ऐसी जगह पर मुझे और मेरे भाई को रहने देना नही चाहती थी। एक बार मेरी मां ने मेरे पिता से बोल कर उनके लिए एक कारोबार स्टार्ट किया । उस दौरान उन्होंने भी इस कारोबार को स्टार्ट करने की सोची और यह स्टार्ट भी हो गया। आगे पारुल ने कहा कि, उस जगह भी काम करते हुए मेरे पिता को एक महिला से प्यार हो गया और उन्होंने शादीशुदा होने के बाद भी दूसरी शादी रचा ली। और मेरी मां और हम भाई - बहनों को छोड़ कर चले गए। लेकिन मेरी मां आत्मनिर्भर महिला थी उन्हे किसी के सहारे की जरूरत नहीं थी। क्योंकि वो एक नौकरी करती थी। 

मां ने कहा आत्मनिर्भर बनो

वही कुछ साल बीतने के बाद फिर मेरे पिता वापस आ गए और मुझे लेकर चले  गए। और मेरा दाखिला किसी स्कूल में करा दिया और वहा के होस्टल में रख दिया। जहा उन्होंने थोड़े पैसे जमा कर दुबारा पैसे नहीं जमा किए। जिस कारण मुझे वहा के होस्टल के बर्तन मांजने पड़े साफ़ - सफाई करना पड़ गया। उस दौरान मुझे वहा एक लड़की मिली जो मेरे घर के पास रहती थी। जिसकी सहायता से मैं मां को चिट्ठी लिखकर यहां का पता दिया। और फिर मेरी मां मुझे वहा से लेकर चली गई। 

आगे पारुल आर्या ने कहा कि, एक बार मैं कुछ काम कर रही थी। तभी मेरी मां अचानक मेरे पास आई और कहा सेल्फ डिपेंडेंट बनो। तब मैं तेरह साल की थी और फिर मैंने छोटे बच्चो को पढ़ना शुरू किया। जिसके बाद ये सिलसिला चलता रहा । और एक समय ऐसा आया की मेरी एक अच्छी जगह जॉब लगी। जो की एक कॉल सेंटर की नौकरी थी और वहा मैंने देश के बाहर के लोगो के साथ भी कॉम्यूनिकेट किया। इस दौरान मेरी इंग्लिश काफी बेहतर हो गई। जिसके बाद मैने वहा की जॉब छोड़ अपना खुद का एक कोचिंग सेंटर स्टार्ट करने का सोचा । और साल 2018 में मैने अपना एक इंग्लिश कोचिंग सेंटर स्टार्ट किया । जहा आज के समय में मेरी कोचिंग में हजारों बच्चे इंग्लिश सीखने आया करते है।