हिमालय के आस पास के इलाकों में आ सकता है बहुत बड़ा भूकम्प , वैज्ञानिक बोले कर लो तेयारी

  
earthquake in himalaya

भारत, चीन और नेपाल सहित कई देशों और राज्यों में बीते दिन भूकंप के झटके मेहसूस हुए थे । जहा नेपाल देश में भूकंप के कारण 6 लोगो की मौत भी हो गई। जैसा की आप सब जानते है नेपाल देश हिमालय की गोद में बसा हुआ है। और ऐसे में अक्सर यहां धरती कांपने की अनुभूति लोगो को होती रहती है। आज से कुछ साल पूर्व 2015 के अप्रैल महीने में काफी भयंकर भूकंप आया था। जिसने लोगो को काफी दहसत में डाल दिया था। उस समय के अकाड़े पर नजर डाले तो, उस दौरान भूकंप के कारण 8,964 लोगो का देहांत हो गया था और 21 हज़ार से ज्यादा लोग घायल हुए थे। वैज्ञानिकों का मानना है कि हिमालय की गोद में बसी हुई क्षेत्र में ऐसे ही विनाशकारी भूकंप आने की संभावना बनी हुई रहती है।

हिमालय क्षेत्र में अक्सर भूकंप आने की संभावना रहती है

हिमालय के इलाकों में भूकंप आने की काफी अधिक संभावना बनी रहती है। और ऐसे में इसका पूर्वानुमान भी नहीं लगाया जा सकता है। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि भूकम्प से डरने के बजाय उसका सामना करने के लिए उसकी तैयारियों पर ध्यान देना चाहिए। भू-भौतिक विज्ञानी डॉक्टर अजय पॉल ने बताया कि इंडियन प्लेट और यूरेशियन प्लेट के टकराने से हिमालय अस्तित्व में आया है और यूरेशियन प्लेट के लगातार इंडियन प्लेट पर दवाब डालने के कारण इसके नीचे एकत्रित हो रही। जिस कारण भूकम्प आने की भी संभावना बनी रहती है। और खबरे यहाँ देखे : Hindi News 

अजय पॉल ने आगे बताया कि हिमालय के निचली सतह पर विकृत एनर्जी एकत्रित होती रहती है। जिस वजह से बड़े भूकंप का आना स्वाभाविक है। और पूरा हिमालय क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से काफी संवेदनशील है।  वही एक विनाशकारी भूकंप रिएक्टर पैमाने पर सात या उससे ज्यादे की गति से भी आ सकती हैं। आगे उन्होंने कहा कि भूकंप आने से पूर्व और उसके आने के बाद की तैयारी में जुटे रहने की जरूरत है। इसके लिए सभी को जागरूक करे और वर्ष में एक बार मॉक ड्रिल किया जाए। ऐसे में यदि इन सब बातो का ध्यान दिया जाए तब भूकंप की नुकसान से बचा जा सकता हैं । 

earthquake

डेढ़ सौ साल पहले कई बड़े भूकंप दर्ज किए जा चुके है

इन सब बातो के दौरान डॉक्टर अजय पॉल ने यह भी कहा कि विकृति उर्जा के निकलने या भूकंप आने का अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। क्योंकि यह कोई नहीं जानता कब भूकंप आ जाए। हालांकि,  हिमालय क्षेत्र में बीते 150 वर्षो में चार विनाशकारी भूकंप  आ चुके है। जिनमें साल 1897 शिलांग में , 1905  कांगडा में , 1934 के टाइम बिहार और नेपाल में इसके अलावा साल 1950 में असम में भी विनाशकारी भूकंप आ चुका है। 

अजय पॉल के अलावा भू - भौतिक वैज्ञानिक डॉक्टर ने भी बताया कि भारत के उत्तराखंड को जोन चार और पांच में रखा जाए। क्योंकि यह राज्य भूकंप के प्रति काफी संवेदनशील है और यहां भी भूकंप आने के काफी संभावनाएं बनी रहती है। उन्होंने कहा कि 24 घंटे में भूकंप की जानकारियों को दर्ज करने के लिए उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश में लगभग साठ भूकंप वेधशाला बनाए गए है।